हरियाली तीज भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है, जो मुख्यतः सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में हरियाली तीज का पर्व 2 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा।
यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, और झारखंड में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे हरियाली तीज की पूजा विधि, व्रत कथा, और इस दिन के विशेष महत्व के बारे में।
हरियाली तीज 2025 का शुभ मुहूर्त
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 2 अगस्त 2025 को सुबह 04:56 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 3 अगस्त 2025 को सुबह 06:12 बजे तक
- पूजा का उत्तम समय (प्रदोष काल): 2 अगस्त 2025 को शाम 06:50 से 08:15 बजे तक
हरियाली तीज का महत्व
हरियाली तीज का पर्व माता पार्वती और भगवान शिव के पुनः मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिन देवी पार्वती द्वारा भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए किए गए 108 जन्मों के कठोर तप को दर्शाता है। इसी दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
यह व्रत महिलाओं को पारिवारिक जीवन में सुख, सौभाग्य, और अखंड सौभाग्य का वरदान देता है। साथ ही यह पर्यावरण और हरियाली से भी जुड़ा पर्व है, जिसमें महिलाएं झूला झूलती हैं, गीत गाती हैं और पारंपरिक श्रृंगार करती हैं।
हरियाली तीज 2025 की पूजा विधि
1. व्रत का संकल्प
सर्वप्रथम प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। ईश्वर का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन निराहार रहने का नियम बनाएं।
2. पूजा स्थल की तैयारी
घर में किसी स्वच्छ और शांत स्थान पर मिट्टी या धातु की चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियों को स्थापित करें।
3. पूजन सामग्री
- लाल या पीले रंग का कपड़ा
- कलश, जल, अक्षत, रोली, चावल
- बेलपत्र, धतूरा, फल-फूल
- मिठाई, खासकर घेवर
- सुहाग की सामग्री (चूड़ी, सिंदूर, मेहंदी आदि)
4. पूजन विधि
- सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करें
- फिर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करें
- बेलपत्र, फूल, धूप-दीप, नैवेद्य अर्पण करें
- माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें
- अंत में व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें
हरियाली तीज 2025 व्रत कथा
बहुत समय पहले हिमालय की पुत्री पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। उन्होंने 108 जन्मों तक तप किया, तब जाकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी रूप में स्वीकार किया। हरियाली तीज के दिन देवी पार्वती ने पुनः शिव से विवाह किया और यह दिन उनका पुनर्मिलन दिवस बन गया।
इस कथा में यह बताया गया है कि कैसे श्रद्धा, तपस्या और भक्ति से पार्वती ने अपने संकल्प को पूर्ण किया। यही कारण है कि विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं और कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए उपवास करती हैं।
हरियाली तीज से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाज
- मेहंदी लगाना: महिलाएं एक दिन पहले हाथों में मेहंदी लगाती हैं
- श्रृंगार: विवाहित स्त्रियां विशेष हरे वस्त्र पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं
- झूला झूलना: गांवों में विशेष रूप से झूले लगाए जाते हैं और महिलाएं गीत गाते हुए झूलती हैं
- घेवर खाना: इस दिन घेवर और मिठाइयों का विशेष महत्व होता है
- सावन गीत: महिलाएं मिलकर सावन के पारंपरिक गीत गाती हैं
हरियाली तीज व्रत के लाभ
- वैवाहिक जीवन में प्रेम और समर्पण बढ़ता है
- पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है
- कुंवारी कन्याओं को योग्य वर प्राप्त होने की मान्यता है
- मानसिक और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है
- पारिवारिक सौहार्द और सांस्कृतिक परंपराओं को बल मिलता है
हरियाली तीज 2025: ध्यान रखने योग्य बातें
- इस दिन जल या अन्न का सेवन न करें (निर्जला व्रत रखना श्रेष्ठ माना गया है)
- किसी से विवाद या कटु वचन न बोलें
- पूजन में कोई भूल हो तो भगवान से क्षमा प्रार्थना करें
- व्रत कथा ध्यानपूर्वक सुनें या पढ़ें
हरियाली तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय नारी की आस्था, श्रद्धा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। वर्ष 2025 में यह पर्व 2 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन का हर क्षण शिव-पार्वती की भक्ति में बिताकर, अपने जीवन को अध्यात्मिक ऊर्जा और पारिवारिक सुख-सौभाग्य से भर सकते हैं।


Leave a Reply